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Who were the human gods Indra, Varuna, who were considered?

मानव देव इंद्र, वरुण कौन थे?

आलेख © कॉपीराइट - साधक प्रभात (Sadhak Prabhat)

मानव देव पर भारतीय परंपरा में दो मान्यताएं हैं।

पहली मान्यता है कि इंद्र आदि देवताओं की रचना ब्रह्मा ने मानसिक रूप से की थी यानी आम मानव नहीं थे जो नर मादा के मिलन से बनते हैं। दूसरी आधुनिक मान्यता है कि मानव इतिहास के प्रारंभ में जब प्रकृति की स्थिति को अंत कर एक नए समाज की संकल्पना रूप लेने लगी तब शपथ द्वारा राजत्व का जन्म हुआ। मानव इतिहास का एक नया अध्याय आरंभ हुआ जिसमें एक व्यक्ति राजा हुआ। बहुसंख्यक लोगों ने समझौते में भाग लिया एवं शपथ ली कि यदि आपलोग अपने अधिकारों को इसी भांति समर्पित करने के लिए प्रस्तुत हैं तो मैं भी अपने अधिकारों को इस व्यक्ति या व्यक्ति समूह को समर्पित करता हूं। ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि प्राकृतिक व्यवस्था में मानव को हत्या का भय हमेशा बना रहता था। और समझौतावादी सामाज में जिसका पहला आधार शांति होती है, जान सुरक्षित रहने की संभावना अधिक थी। अधिकार पाए इन मानवों या मानव समूहों को शपथ लेने की आवश्यकता नहीं थी, अत: यह पूर्ण स्वतंत्र एवं स्वेच्छाचारी बना। यही लोग मानव-देव के रुप में प्रतिष्ठित हुए। थामस हाव्स आदि पाश्चात्य विद्वान इस मत के समर्थक रहे हैं।
प्राचीन भारतीय शास्त्रों में वर्णित मात्स्यन्याय यही है। भारतीय ऋषियों ने पूर्ण स्वतंत्र एवं स्वेच्छाचारी मानवदेव अथवा राजा को किसी नियम से बद्ध न होने के वजह से देव से दानव होने के खतरे को देखते हुए उसे धार्मिक नियमों से नियंत्रित रहना आवश्यक बताया। जब मनुष्यों ने जीवन-रक्षा के उद्देश्य से राज्य की स्थापना की, नियंत्रण स्वीकार किया तो फिर राज्य प्रदत्त नागरिक स्वतंत्रता से अधिक स्वतंत्रता व्यक्ति के लिए संभव नहीं रहा। इस स्थिति में समाज को सुचारू रूप से चलाने हेतु एवं निर्बलों के हितों की रक्षा हेतु धर्म एवं इसके नियम अनिवार्य हैं।

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