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पौष अमावस्या बकुला अमावस्या व्रत

Paush Amavasya Vrat

पौष अमावस्या का महत्व Paush Amavasya
 

पौष अमावस्या

पौष मास की अमावस्या जिसे बकुला अमावस्या कहते हैं पौष माह की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को होती है। शास्त्रों के अनुसार पौष मास को 'छोटा श्राद्ध पक्ष' भी कहा जाता है। पौष माह में पितरों के लिए पूजा और धार्मिक कार्य करने का प्रावधान है। इस माह में पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान के साथ-साथ भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। पौष मास के दिन व्रत करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।शनि के दुष्प्रभावों से राहत मिलती है। पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस दिन उपवास भी रखा जाता है। शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन 7 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है। भगवान शंकर, शनिदेव के गुरु माने जाते हैं। इसलिए इस दिन भगवान शिव की आराधना करने और शिवलिंग पर तिल का जल अर्पित करने वालों को शनि देव का आशीर्वाद मिलता है।

पौष अमावस्या के व्रत कर शनि देव को इस दिन प्रसन्न करें -


अमावस्या का दिन शनि को प्रसन्न करने के लिए अति उत्तम माना जाता है। इस दिन पीपल के पेड़ का पूजन जरूर करना चाहिए। पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और शनि के मंत्र 'ऊं शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें। पौष अमावस्या के दिन शनि मंदिर जरूर जाएं और शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल या फिर तिल का तेल चढ़ाएं। इससे शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल जाती है। पौष अमावस्या पर शनि को प्रसन्न करने के लिए शनि स्तोत्र के साथ दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

पौष अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए ?

इस दिन हनुमान मंदिर जाने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन गरीबों को काले तिल या सरसों का तेल दान करें। इस दिन गलती से भी मांसाहारी भोजन या शराब का सेवन न करें। अगर आपके घर के आसपास कहीं शमी का पेड़ है तो उस पर जल, सरसों का तेल, काले तिल, गुड़ आदि चढ़ाकर उसकी पूजा करें। इस दिन शनि देव की छवि, यंत्र या मूर्ति के सामने शनि मंत्रों या चालीसा का जाप करना चाहिए।

पौष अमावस्या के दिन साबुत उड़द,लोहा,तेल,तिल के बीज,पुखराज रत्न और काले कपड़े का दान करना अति उत्तम रहता है। इस दिन शुभ शनि यंत्र घर में लाकर उसकी पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

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पौष अमावस्या जितिया Jivitputrika Vrat Jitiya