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सूर्य माहात्म्य - चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना

Surya Mahatmya - Fourth Chapter Getting the desired result

 
अचला सप्तमी रथ सप्तमी सूर्यरथ सप्तमी आरोग्य सप्तमी सौर सप्तमी अर्क सप्तमीऔर भानुसप्तमी
 
आलेख © कॉपीराइट - साधक प्रभात (Sadhak Prabhat)

सूर्य माहात्म्य - चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना

श्रीमहापुराण सूर्य माहात्म्य की रचन गोस्वामी तुलसी दास जी ने की है। इसमें कुल बारह अध्याय हैं।

चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना

चौपाई

यात्रा जो नर करै विदेशा ।
सो नित सुनै पुरान सुरेशा॥

निश्चय तासु सकल शुभ होई ।
लाभ भवन चलि आवै सोई॥

जो चिंतन हो ऋण अधिकारी।
सो यह कथा करै अनुसारी॥

निश्चय ऋणहु सकल मिटि जाई।
धनि महिमा है सूर्य गुसाई॥

दोहा

यात्रा को नर जब चले, तब यह सुने पुरान ।
निश्चय नमवांछित सकल पुरवहिं श्रीभगवान ॥

॥  इति श्रीमहापुराणे सूर्यमाहात्म्ये मनवांछित- फलदो नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥4॥

 

सूर्यदेव * अचला सप्तमी * सूर्य षष्ठी - छठ पूजा * आदित्य हृदय स्तोत्र * सूर्य गायत्री मंत्र * सूर्य स्त्रोत इक्कीस नाम * महीने के अनुसार सूर्य की उपासना * सोलह कलाओं पर सूर्य के नाम * सूर्य के 31 नाम * द्वादश आदित्य * भानुसप्तमी * सूर्य ध्यान स्तुति एवं जप * सूर्य माहात्म्य - प्रथम अध्याय वन्ध्या स्त्री वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दूसरा अध्याय कुष्ठ निवारण * सूर्य माहात्म्य - तीसरा अध्याय अंधे को दृष्टि मिलना * सूर्य माहात्म्य - चौथा अध्याय मनोवांछित फल मिलना * सूर्य माहात्म्य - पंचम अध्याय नारद का नग्न युवती देख मोहित होना * सूर्य माहात्म्य - षष्ठ अध्याय सूर्य माहात्म्य वर्णन * सूर्य माहात्म्य - सप्तम अध्याय सूर्य के पूर्व दिशा में उदय होने का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - अष्टम अध्याय नारद का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - नौवां अध्याय सूर्य माहात्म्य में कलि का वर्णन * सूर्य माहात्म्य - दसवाँ अध्याय बारह मास * सूर्य माहात्म्य - ग्यारहवाँ अध्याय व्रत विधान * सूर्य माहात्म्य - बारहवाँ अध्याय उमामहेश्वर संवाद

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