चैत्र नवरात्रि घटस्थापना एवं पारण का शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurta
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना एवं पारण का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि, जिसे वासंती नवरात्रि भी कहते हैं , चैत्र माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शुरू होकर राम नवमी ( चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी ) के साथ संपन्न होता है। यह आमतौर पर मार्च-अप्रैल महीने में पड़ता है। चैत्र नवरात्र में माता के नौ रूप शैलपुत्री, ब्रह्मचारणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
गृहस्थ जीवन वाले साधक निराहार या फलाहार अथवा एक शाम के भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करते हुए नौ दिन दुर्गा सप्तशती, दुर्गा सप्तशती कवच, दुर्गा सप्तशती अर्गला, दुर्गा सप्तशती कीलक, सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम्, श्री दुर्गा चालीसा, श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा, श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्र, दुर्गा मन्त्र, श्री दुर्गा आरती, श्री विन्ध्येश्वरी आरती, श्रीदुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (32 नाम) , दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम) , अपराजितास्तोत्रम्, श्रीललिता सहस्रनामावली, चण्डीकवचम्, भगवतीस्तुतिः, श्रीभगवती स्तोत्रम, दुर्गा सप्तशती क्षमा प्रार्थना, दुर्गा सप्तशती अथ देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्, रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, राम रक्षा स्त्रोत्र, दुर्गा सहस्त्र नाम, आदि का पाठ करते हैं। माँ दुर्गा से सिद्धि पाने की चाह रखने वाले साधक मंत्रो का जप करते हैं जो या तो गुरु के द्वारा प्रदत होता है या उनकी राशि के अनुसार होता है।
